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अखिलेश यादव करहल से चुनाव जीते है लेकिन उनकी पार्टी समजावादी पार्टी यूपी की सत्ता में दुबारा वापसी नहीं कर पाई,
इस कारण से अखिलेश यादव अपनी विधायकी से इस्तीफा देंगे और अपने सांसद पद पर बरकरार रहेंगे,
उनके चाचा शिवपाल होंगे नेता प्रतिपक्ष और वो उत्तरप्रदेश विधानसभा में योगी आदित्यनाथ के सामने रहेंगे और 5 साल तक विपक्ष में रहकर मुद्दे उठाएंगे।


अखिलेश यादव के साथ-साथ आजम खान भी यूपी विधानसभा में नहीं जाएंगे और भारत की संसद बतौर सांसद कायम रहेंगे तो इन 2 सीटों पर रामपुर और करण में बाय इलेक्शन निश्चित है।
अखिलेश यादव ने अपनी प्राथमिकता सिद्ध कर दी है कि वह सदन में योगी के सामने नहीं रहेंगे और बतौर सांसद दिल्ली में रहकर पार्टी का काम करेंगे।


अब बेहद चौंकाने वाला फैसला कुछ दिनों में यह हो सकता है कि केशव प्रसाद मौर्या को भी राज्यसभा के रास्ते दिल्ली भेज दिया जाए।


अखिलेश यादव ने अपने सभी विधायकों को 21 मार्च को अपने लखनऊ आवास पर मिलने के लिए बुलाया है जिसके उपरांत सदन की जिम्मेदारियों की घोषणा भी पार्टी कर सकती है।

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